04 November 2015

HALL OF FAME LINES

HALL OF FAME - ENDING LINES

यही था सफर मेरा 
और यही मेरी कहानी 
पर लगेगी आपको भी 
ये कुछ जानी पहचानी 
क्योंकि रहती है 
हर घर में 
मुझ जैसी एक गुड़िया रानी
हैं पापा हीरो मेरे 
बस  दूर करो अँधेरे
मैं लगती मम्मी जैसी 
तो फर्क की दीवार कैसी
मुझे खुल के अब जीना है 
हर बेटी एक नगीना है
मुझे पंख दे दो 
और खुल के बस  उड़ने दो 
मुझे  बेख़ौफ़ अब रहना है 
और सबसे ये कहना है 
मैं हूँ आपका  हिस्सा 
मेरा इतना सा ही किस्सा 
मांगती हूँ अपना अधिकार 
फिर देखो मेरी रफ़्तार 
मैं ही लक्ष्मीबाई 
मैं ही इंदिरा गांधी 
 हवा  हूँ मैं  ऐसी 
जो दायरों में न जाये बाँधी 
मेरी क़ाबलियत पर  न रखना 
मन में कोई सवाल 
मेरी आवाज़ ऐसी गूंजी 
मुझ में है श्रेया घोषाल 

जो फर्क करना सिखाये 
खुद तोड़ो वो दीवार 
न ये लड़की की जीत 
न किसी लड़के की हार 
बस एक बच्चा है आपका 
जो मांगता है 
तो मांगता प्यार 





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